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Monday, 22 August 2016

सतोपन्थ ट्रैक (भाग ९)- सतोपन्थ से बद्रीनाथ वापसी

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सतोपन्थ से बद्रीनाथ वापसी
बुखार की वजह से पूरी रात अच्छे से सो नहीं पाया। कभी आँख लगती भी तो जोर से ग्लेशियरों के टूटने की आवाज आती। कभी ऊपर पहाड़ों से बर्फ के टूटकर गिरने की आवाज आती तो आँख खुल जाती। डर भी लग रहा था कि कहीं ये गिरकर हमारे ही ऊपर ना आ जाएँ। सुबह उजाला होते ही टेण्ट छोड़ दिया। मौसम अब भी साफ़ नहीं था। लग रहा था कभी भी बारिश हो सकती है।

सतोपन्थ से वापसी

Friday, 29 July 2016

सतोपन्थ ट्रैक (भाग ७)- चक्रतीर्थ से सतोपन्थ


चक्रतीर्थ से सतोपन्थ

रात भर नींद नहीं आई, बस इसी इन्तज़ार में रात कटी कि कब सुबह हो। बादल भी लगभग पूरी रात रुक-रुक कर बरसते ही रहे। सुबह उजाला होते ही टेण्ट से बाहर निकल आया। मालूम पड़ा जाट देवता और सुमित भी अच्छे से सो नहीं पाए। अपनी टोइलेट्री किट उठाई और आधा किलोमीटर दूर जहाँ पानी उपलब्ध था फ्रेश होने जाना पड़ा। चार हज़ार मीटर की ऊँचाई पर नित्यकर्म से निवृत होने के लिए सुबह-सुबह आधा किलोमीटर दूर जाना भी अपने आप में एक ट्रैक करने के समान ही होता है। कई साथी तो इस दूरी को देखकर गए ही नहीं। कुछ एक ऐसे थे कि पानी नहीं तो मुझसे टॉयलेट पेपर लेकर नजदीक ही गए, इसी से काम चला लेंगे। चाय पीकर आज की ट्रैकिंग की बात होने लगी। चक्रतीर्थ से सतोपन्थ की दूरी छह किलोमीटर है। चक्रतीर्थ जहाँ समुद्र तल से 4100 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है वहीँ सतोपन्थ 4350 मीटर की ऊँचाई पर।

Tuesday, 26 July 2016

सतोपन्थ ट्रैक (भाग-६)- लक्ष्मीवन से चक्रतीर्थ


लक्ष्मीवन से चक्रतीर्थ

हिमालय की ऊँची चोटियों पर सूर्यादय जल्दी होने के साथ-साथ सुबह भी जल्दी हो जाती है। टेण्ट के बाहर कुछ साथियों की हलचल भी सुनाई देने लगी थी। बाहर तापमान काफी कम था, फिर भी जितनी उम्मीद थी उतनी ठण्ड नहीं झेलनी पड़ी। जहाँ पर हमने टेण्ट लगाए थे, उससे दो सौ मीटर की दूरी पर ऊपर ग्लेशियर से बहकर आता एक बर्फीले पानी का नाला था। ब्रश आदि लेकर वहीँ गए और फ्रेश हो गए। मुहँ धुलने के बाद अंगुलियां ऐसी सुन्न पड़ी कि जल्दी से वहीँ पर बबूल की सूखी घास इकठ्ठा करके आग जलाकर हाथ सेकने पड़े, तब जाकर कुछ शान्ति मिली।

Thursday, 21 July 2016

सतोपन्थ ट्रैक (भाग ५)- बद्रीनाथ से लक्ष्मीवन

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बद्रीनाथ से लक्ष्मीवन

सुबह पाँच बजे आँख खुल गई। रमेश जी और सचिन त्यागी को भी बद्रीनाथ से ऋषिकेश जानी वाली पहली बस से वापिस जाना था। दोनों लोगों से विदा ली और फ्रेश होकर यात्रा की तैयारी करने लग गए। गज्जू भाई को सुबह जल्दी आकर राशन व अन्य सामान की पैकिंग करने को कहा था लेकिन वो अभी तक नहीं पहुंचा। फिर भी सभी मित्र तैयार होने लगे। आज हमको बद्रीनाथ से बारह किलोमीटर दूर लक्ष्मीवन में रुकना था। बद्रीनाथ की समुद्र तल से ऊँचाई लगभग ३१५० मीटर है, जबकि लक्ष्मीवन लगभग ३७०० मीटर की ऊँचाई पर स्थित है। चढ़ाई के मामले में आज आसान चढ़ाई मिलने वाली थी।

Saturday, 16 July 2016

सतोपन्थ ट्रैक (भाग ४)- वसुधारा से बद्रीनाथ और तैयारियां

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वसुधारा से बद्रीनाथ और तैयारियां

हम दोनों जब बाबा जी की कुटिया में गए तो वहां पहले से ही तीन चार लोग बाबा जी के साथ बैठे थे। एक दो बुजुर्ग भी थे, शायद गुजरात से आए हुए श्रद्धालु थे। नौजवान बाबा जी सभी को चाय जरूर पिलाते हैं। अगर भूखे होंगे तो भोजन भी करवा देते हैं। बाबा जी की बातों से ही आभास हो रहा था कि पढ़े लिखे इंसान हैं।

Thursday, 30 June 2016

सतोपन्थ ट्रैक (भाग ३) - जोशीमठ से वसुधारा

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सतोपन्थ यात्रा (भाग ३) - जोशीमठ से वसुधारा


रात को सोने से पूर्व बाकी साथियों से बात हुई थी तो उनको कहा था कि सुबह दस बजे तक बद्रीनाथ पहुँच जाऊंगा। पिछले ३६ घण्टे से सोया ना होना और सफ़र की थकावट की वजह से सुबह आठ बजे आँख खुली। सुमित को उठाया तो उठ नहीं रहा था। फिर प्रवचन दिया कि तू क्या यहाँ सोने आ रखा है ? सुबह-सुबह के मेरे प्रवचनों से बचने का उसके पास जो सबसे अच्छा उपाय वो अपना सकता था, वही उसने अपनाया। बड़बड़ाते हुए उठ कर बाथरूम में घुस गया।

Monday, 27 June 2016

सतोपन्थ ट्रैक - (भाग २)- दिल्ली से जोशीमठ


सफ़र में जब पूरी मण्डली साथ हो तो हँसी मजाक और ठहाकों का दौर ना चले ऐसा हो नहीं सकता। सभी मित्र दो-दो की सीट में एक साथ बैठे थे, सिर्फ विकास अकेला बैठा था। विकास के साथ वाली सीट पर एक सुन्दर कन्या उसके साथ आकर बैठ गयी। सभी विकास की किस्मत से जल भुन गए। पूरे रास्ते अपनी भड़ास उसकी टांग खिंचाई करके निकालते रहे। 

Friday, 24 June 2016

सतोपन्थ ट्रैक :- आयोजन और तैयारियाँ




सतोपन्थ, ये नाम प्रकृति प्रेमियों के साथ-साथ धार्मिक यात्रियों को बरबस अपनी ओर खींचता रहता है। समुद्र तल से ४३०० मीटर की ऊँचाई पर स्थित इस पवित्र झील को देखने व् इसमें स्नान करने हेतु प्रति वर्ष कई ट्रैकर और श्रद्धालु यहाँ तक आ पहुँचते हैं। पुराणों के अनुसार महाभारत युद्ध के पश्चात पाण्डव अपनी अन्तिम यात्रा पर इसी मार्ग से होकर गुजरे थे। एक-एक कर पाण्डव देह त्याग करते रहे। अन्त में धर्मराज युधिष्टिर ही स्वान के साथ पुष्पक विमान पर सवार होकर सशरीर स्वर्ग गए। इस ट्रैक पर आधारित T- Series की एक C.D. मार्किट में बहुत प्रचलित है।