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भदरवाह से कैलाश कुण्ड
जैसे ही ये मालूम पड़ा कि कोठारी जी का बैग होटल में ही छूठ गया है, जिसमें कि उनका बटुआ, मोबाइल, कैमरे का लेंस आदि सब कुछ है, तो रमेश जी ने संकरी सी सड़क पे गाडी सौ की स्पीड में दौड़ा दी। मुश्किल से दो से तीन मिनट में सीरी बाजार के मुख्य चौक स्थित होटल पर पहुँच गए। देखा तो होटल मालिक ने बैग को सुरक्षित अपने पास रखा हुआ है, और हमारे भोजन को पैक कर रहा है। साँस में साँस आई, दिन का भोजन और रात के लिए पराँठे पैक करवा लिए। कुछ बिस्कुट के पैकेट व टॉफी पहले ही रख लिए थे। कैलाश कुण्ड ट्रैक पर कहीं भी खाने व रहने की व्यवस्था नहीं है, साथ ही छतरगला में भी कुछ मिलने वाला नहीं था। खाना पैक करवाकर छतरगला के लिए प्रस्थान कर दिया, जो कि भदरवाह से लगभग पैंतीस किलोमीटर दूर है।
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Wednesday, 12 October 2016
जम्मू-कश्मीर यात्रा:- भदरवाह से कैलाश कुण्ड
Saturday, 24 September 2016
जम्मू-कश्मीर यात्रा:- उधमपुर से भदरवाह
उधमपुर से भदरवाह
सुबह छह बजे आँख खुल गई। हमारे कूपे में कुछ नौजवानों का एक ग्रुप था, जो वैष्णो देवी की यात्रा पर जा रहे थे। कुछ देर उनसे बातचीत हुई। उनको जम्मू ही उतरना था यहाँ से सड़क मार्ग से आगे जाएंगे। सात बजे हमारी ट्रेन जम्मू पहुँच गई। आधी से ज्यादा ट्रेन यहीं खाली हो चुकी थी। लगता है अधिकतर लोग वैष्णो देवी की यात्रा के लिए ही इस ट्रेन से सफ़र कर रहे थे। कोठारी जी व शशि भाई भी हमारे ही कूपे में आ गए। जम्मू से आगे उधमपुर तक शिवालिक की पहाड़ियों से ट्रेन में गुजरते हुए शानदार नज़ारे देखने को मिलने वाले थे। कुल छोठी बड़ी बाईस सुरंगों से होकर ट्रेन गुजरने वाली थी। जम्मू से उधमपुर की दूरी लगभग पचपन किलोमीटर है। रमेश जी को सूचित कर दिया कि ट्रेन जम्मू से चल पड़ी है। मैंने खिड़की की सीट पर कब्ज़ा कर लिया और बाहर के शानदार नज़ारे देखने लगा।
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