हेलंग-कल्पेश्वर-दुमुक( ठुमुक-ठुमुक के चल दुमुक)
सुबह पांच बजे का अलार्म लगाकर सोये थे लेकिन उसकी जरुरत ही नहीं पड़ी, पहले ही नींद खुल गयी और साथ ही सभी को जगा दिया । छह बजे तक सभी तैयार होकर जीप वाले की प्रतीक्षा करने लगे, जीप वाले की क्या गाय की प्रतीक्षा करने लगे। असल में गाय के मालिक ने ऊपर किसी गाँव से गाय को लेकर आना था और उसे देवग्राम तक छोड़ना था। काफी देर प्रतीक्षा करने के बाद भी जब गाय नहीं पहुंची तो जीप मालिक ने गाय मालिक को फोन लगाया, मालुम पड़ा गाय आज नहीं जायेगी। फिर से जीप मालिक को तैयार किया कि कोई बात नहीं एक जन्तु ही तो कम हुआ, पांच तो चल ही रहे हैं, इन पांच को तो छोड़ आओ। जीप मालिक ७००/= रुपये में चलने को तैयार हो गया। अमित भाई और डोभाल ने आगे ड्राईवर के साथ वाली सीट पर कब्ज़ा कर लिया। मैं, महेश जी और मिश्रा जी पीछे खुले वाले स्थान पर खड़े होकर यात्रा करेंगे। इस तरह खुले ट्रक में यात्रा करने का भी अलग ही आनंद है।