लाखामंडल से सांकरी....
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लाखामंडल से आधा किलोमीटर नीचे पहुँचे ही थे कि सड़क पर भेड़ों ने कब्ज़ा किया हुआ था, गाडी रोकनी पड़ी। दो स्थानीय महिलाओं ने पूछा कि क्या बर्निगाड़ तक छोड़ दोगे ? आज २६ जनवरी है, तो मुझे लगा ये यहाँ स्कूल में अध्यापिकाएं होंगी। उनको बिठाकर आगे बढ़ चले, उनसे पुछा तो मालूम पड़ा दोनों महिलाएं यहाँ दो अलग-अलग गाँवों में आंगनबाड़ी में कार्यरत हैं। १५ किलोमीटर आगे नौगांव में कमरा किराये पर लेकर अपने बच्चों को वहीँ पढ़ा रही हैं, साथ ही नौकरी भी कर रही हैं। जब उन्होंने मुख्य सड़क से हमको अपनी कार्यस्थली दिखाई तो हम दोनों दंग रह गए।