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Saturday, 19 March 2016

हर की दून ट्रैक:- हर की दून से साँकरी

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हर की दून से साँकरी
लगभग दो बजे हर की दून से निकल पड़े। शाम को छह बजे अँधेरा हो जायेगा। चार घण्टे में चौदह किलोमीटर चलना है। रूपकुण्ड ट्रैक पर अँधेरे में की गयी भागमभाग में पाँव तुड़वा चुका था, यहाँ दुबारा नहीं तुड़वाना चाहता था। फिर भी जब तक उजाला है, जितनी तेज चल सकें उतना अच्छा। आधे घण्टे में उस जगह पहुँच गए जहाँ सीमा से आने वाला रास्ता, ओसला वाले रास्ते से मिलता है। भागमभाग के चक्कर में ओसला वाला रास्ता पता ही नहीं पड़ा कि कब पीछे छूट गया। वो तो सुपिन पर लकड़ी का पुल देखा फिर समझ आया कि गलत आ गए हैं।

Friday, 11 March 2016

हर की दून ट्रैक:- ओसला से हर की दून


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ओसला से हर की दून


सुबह पाँच बजे का अलार्म लगाकर सोये थे, लेकिन अलार्म की जरुरत ही नहीं पड़ी। उससे पहले ही नींद खुल गयी। बड़ी अच्छी नींद आई, लकड़ी के घर वाकई में ठण्ड को बढ़िया से रोकते हैं। बाहर अँधेरा था, फिर भी फ्रेश होकर कपडे पहन लिए। बलबीर जी ने चाय-नाश्ता और आठ पराठें दिन के भोजन के लिए कमरे में पहुंचा दिए। मनु भाई का मन था कि अँधेरे में ही निकल पड़ते हैं, लेकिन मैं पौ फटने के बाद ही निकलना चाहता था।