बात जनवरी महीने की है, ट्रैकिंग का कीड़ा बहुत जोरों से काट रहा था। सर्दियों में अमूमन हिमालय के निचले पहाड़ भी बर्फ से लद जाते हैं। 2500 मीटर की ऊंचाई पर भी अच्छी खासी बर्फ गिर जाती है। जो ज्यादा ही खुराफाती ट्रेकर होते हैं, वही हिमालय में 4000 मीटर या उससे ऊँची जगहों पर जाने की हिम्मत करते हैं। खूब दिमाग दौड़ाया कि इस भयंकर सर्दी में कहाँ ट्रेक पर जाऊँ क्योंकि ट्रैकिंग सीजन कब का ख़त्म हो चूका था। अभी तो जहाँ देखो वहां 5-6 फ़ीट से ज्यादा बर्फ गिरी पड़ी है। फिर बर्फ में अकेले ट्रैक किया नहीं जा सकता, खाना, पीना, रहना सब खुद करना पड़ता है। कुछ समझ नहीं आ रहा था क्या किया जाए। आखिरी में अपने बचपन के दोस्त भरत कठैत को अपनी समस्या बताई तो उसने कहा मैं देवरिया ताल चोपता - तुंगनाथ जा रहा हूँ, साथ चलना है तो आ जा। बस सोचना भी क्या था तुरन्त हाँ बोल दिया। भरत टूरिस्ट गाइड है, और वो एक ग्रुप को यहाँ ट्रैकिंग पर ले जा रहा था। तारीख तय हो गई कि 26 तारीख को मैं सीधे देवरिया ताल में मिलूँगा।